अनचाहा गर्भ क्या है?
भूमिका
अनचाहा गर्भ की स्थिति
भूमिका
सीता एक बच्चा है| उसकी उम्र एक साल की है| सीता अब भी अपने बच्चे को अपना दूध
पिलाती है| बच्चे
के जन्म के 6
माह बाद सीता की माहवारी पहले जैसी शुरू हुई| अब उसे हर माह समय से माहवारी होने लगी|
एक साल तक सब कुछ ठीक था| के माह सीता देवी की माहवारी नहीं हुई| उसने या बात अपने पति अर्जुन को बताई| दोनों बहुत चिंतित हुए| उन्हें लगा कि सीता फिर से गर्भवती हो
गई है| उनके
चिंता की वजह भी थी| इस दौरान दोनों ने ही किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नही किया था|
अर्जुन और सीता ने आपस में विचार कर या
तय किया था कि दूसरा बच्चा दो साल के बाद करेंगे| वे अभी बच्चा नही चाहते थे| परन्तु सीता अब गर्भवती हो गई है| यही अनचाहा गर्भ है|
अनचाहा
गर्भ की स्थिति
यदि गर्भ ठहर गया हो और पति-पत्नी गर्भ
की अवस्था को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं तो या एक अनचाहा गर्भ की स्थिति है|
हमने पूर्व में सावित्री और प्रीति की
कहानी देखी उर पढ़ी है| दोनों हो अपनी गर्भवस्था को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है| ऐसे हो बहुत से दम्पति होते है, जो गर्भावस्था को आगे नहीं बढ़ाना चाहते
है|
अनचाहे गर्भ का स्थानीय ईलाज
भूमिका
अनचाहे गर्भ का स्थानीय ईलाज
भूमिका
स्थानीय स्तर पर अनचाहे गर्भ को हटाने
के बहुत से उपाय उपलब्ध है| आमतौर पर गांवों में लोग जड़ी-बूटी तथा आयुर्वेद का सहारा लेते हैं| परन्तु यह शायद ही काम करता है और गर्भ
बढ़ता जाता है|
गाँव से स्तर पर दाईयों के काम करने का
तरीका अलग होता है| कुछ दाई योनि के रास्ते पतली लकड़ी डालकर गर्भ गिराने का काम करती है| कुछ डागरीन इस काम के लिए लोहे की छड़
का इस्तेमाल करती है| कुछ मामलों में इन तरीकों से सफलता मिलती है| परन्तु आमतौर पर ऐसे तरीकों से
परेशानियों बढ़ सकती है|
अनचाहे गर्भ का स्थानीय ईलाज
अधूरा गर्भपात होने के कारण ज्यादा खून
का बहना| इस
वजह से शरीर कमजोर होगा और कभी-कभी मौत भी हो सकती है|
पेडू का दर्द, बुखार तथा योनि से बदबूदार स्त्राव
होना |
कुछ मामलों में महिला दुबारा गर्भवती
नही हो सकती |
हर वर्ष गर्भपात के दौरान अनेकों
महिलाएं मौत की शिकार होती है| मौत का कारण अत्याधिक रक्त- स्राव, बुखार या सफाई के दौरान गर्भाशय का फट
जाना हो सकता है|
आपके क्षेत्र में अनचाहे गर्भ का
स्थानीय ईलाज क्या है?
क्या आपने असुरक्षित गर्भपात के कारण
महिलाओं की मौत के बारे में सुना है?
अनचाहे गर्भ की स्थिति में पति-पत्नी
क्या करते है?
भूमिका
अनचाहे गर्भ की स्थिति में क्या करें
भूमिका
यह शंका होने पर कि उषा गर्भवती हो
सकती है, मोहन
उसे पास के एक दवा की दुकान पर गया| उसे अपनी परेशानी बताई| दुकानदार ने उषा के पेशाब की जाँच के
बाद उसने बताया कि उषा गर्भवती है| उसने उषा को खाने की कुछ गोलियां दी| उसने कहा कि गोलियों लेने से गर्भ निकल
जायेगा और माहवारी नियमित हो जाएगी| परन्तु उषा की माहवारी नहीं आई|
अनचाहे गर्भ की स्थिति में क्या करें
प्रीति एक अविवाहित लड़की है| वह अपनी परेशानी को लेकर लगातार
स्थानीय हकीम के पास जाती रही| परन्तु उसने हकीम को यह नहीं बताया कि उसकी माहवारी अनियमित हो गई है|
सीता के साथ दूसरी घटना है| माहवारी न आने पर उसकी माँ उसे
जड़ी-बूटियों का रस पीने को देती रही| सीता तीन दिनों तक रोज सुबह रस सेवन
करती है|
करुणा को तीन माह का गर्भ है| वह और उसका पति अभी बच्चा नहीं चाहते
है| दोनों
ने यह तय किया कि स्थानीय नर्स पुष्पा से मिलकर गर्भ की सफाई करवा लेंगे|
अनचाहे गर्भ की स्थिति में अधिकांश
दम्पति गर्भ को हटाना ही चाहते है| गाँव के स्तर पर जिनसे वे सामान्य तौर
पर सलाह लेते हैं, वे हैः
I.
जड़ी-बूटी से ईलाज करने वाले
II.
स्थानीय दवा की दुकान
III.
स्थानीय हकीम
IV.
स्थानीय नर्स, जो सर्जरी से गर्भपात कराती हो
V.
प्रशिक्षित डॉक्टर
VI.
गाँव या उसके नजदीक इन लोगों के उपलब्ध होने के कारण सलाह के लिए लोग
इनके पास जाते है|

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