महिला स्वास्थ्य गर्भपात कैसे करें
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भूमिका
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सुरक्षित तथा असुरक्षित गर्भपात
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असुरक्षित गर्भपात से मृत्यु
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सुरक्षित गर्भपात की उपलब्धता
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गर्भ की क़ानूनी/ चिकित्सकीय समाप्ति
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सुरक्षित गर्भपात कराने में अन्य अड़चनें
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ऐम्नीओसेन्टीसिस
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अल्ट्रासाउंड
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गर्भपात कराने का निर्णय लेना
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गर्भपात के सुरक्षित तरीके
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कैसे बताएं कि गर्भपात सुरक्षित होगा या नहीं
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सुरक्षित गर्भपात के दौरान क्या उम्मीद रखें
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गर्भपात के पश्चात क्या आशा करें
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गर्भपात के पश्चात अपनी देखभाल कैसे करें
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खतरे के लक्षण
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गर्भपात के पश्चात परिवार नियोजन
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गर्भपात की जटिलताएं
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शॉक
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संक्रमण
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असुरक्षित गर्भपात की रोकथाम
भूमिका
गर्भपात कुछ महिलाओं का गर्भ पूरे समय
ठहर नहीं पाता है। कभी-कभी शरीर गर्भ को प्रतिक्रियात्मक रूप से, स्वयं ही गिरा देता है।इसे स्वत:
गर्भपात कहते हैं (मिसकैरेज)। कुछ स्त्रियाँ गर्भ गिराने का फैसला करती हैं। उसे
उत्प्रेरित गर्भपात कहते हैं। यह एक सोचा-समझा हुआ, नियोजित निर्णय होता है ।
गर्भपात कराने का फैसला हमेशा ही कठिन
होता है । इस फैसले के निम्न कारण हो सकते हैं :
गर्भ धारण से मां का स्वास्थ्य, या उसकी जान को खतरा है। होने वाले
बच्चे को कोई गंभीर विकलांगता होने का संदेह है।बलात्कार के बाद गर्भ ठहर जाना।
परिवार नियोजन के साधन की विफलता।
अन्य बच्चे अभी बहुत छोटे हैं।
पहले ही परिवार के बच्चों की संख्या
पर्याप्त है ।
माता-पिता को बच्चा नहीं चाहिए ।
कोई महिला को गर्भपात कराने के लिए
विवश कर रहा है ।
अनियोजित तथा अवांछित गर्भ के कारण
पति पत्नी दोनों गर्भ गर्भ धारण की
प्रक्रिया से बिल्कुल अनजान हैं ।
स्वास्थ्यकर्मी यह सोचता है कि कुछ
महिलाएं इन साधनों के उपयोग के लिए अभी कम आयु की हैं ।
महिलायों के साथ बलात संभोग किया जाता
है ।
परिवार नियोजन के साधन उपलब्ध नहीं हैं
या उन्हें ठीक से इस्तेमाल नहीं किया जाता है, या फिर विफल हो जाते हैं, या फिर जब तक उसे बच्चे पैदा करने के
लिए विवश किया जाता है ।
सुरक्षित तथा असुरक्षित गर्भपात
गर्भपात कराना सुरक्षित रहता है, अगर
एक कुशल तथा अनुभवी डॉक्टर के द्वारा
किया जाए।
उचित उपकरणों का इस्तेमाल किया जाए।
स्वच्छ वातावरण हो। ऐसी कोई भी वस्तु,जो योनि तथा गर्भाशय में डाली जाती है,वह पूर्णतया कीटाणुरहित होनी चाहिए।
अंतिम माहवारी की तिथि के 3 महीने (12 सप्ताह) के अंदर किया गया है।
सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त.
लाइसेंसशुदा चिकित्सालय में किया जाए।
गर्भपात करना असुरक्षित होता है, अगर :
किसी ऐसे व्यकित द्वारा किया जाए, जो इसके लिए प्रशिक्षित न हो।
गलत औजारों, या दवाईयों से किया जाए।
गंदे वातावरण में किया जाए।
मान्य संस्थानों पर न किया जाए।
3 महीनों (12 सप्ताह) के गर्भ धारण के पश्चात कराया
जाए, जब
तक कि विशेष उपकरणों वाले अस्पताल, या स्वास्थ्य केंद्र में न हो।
असुरक्षित गर्भपात से मृत्यु
पूरे विश्व में प्रतिवर्ष उत्प्रेरित
गर्भपात किये जाते हैं। अधिसंख्य स्त्रियां इनसे बच जाती हैं, चाहे वे गैरकानूनी ढंग से ही क्यों न
किये गए हों। लेकिन असुरक्षित गर्भपातों से मृत्यु या संक्रमण, लगातार रहने वाला दर्द तथा संतानहीनता
जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। बेहद परेशानी या हताशा में महिलाएं गर्भ को समाप्त
करने का कोई न कोई साधन ढूंढने का प्रयत्न करती हैं। उन्हें नीचे वर्णित तरीकों से
एकदम बचना चाहिए। ये बहुत खतरनाक हो सकते हैं ।
योनि या गर्भाशय में छड़ी, पिन, तार जैसी पैनी वस्तुएं, या प्लास्टिक की नली कदापि न डालें ।
ये गर्भाशय को चीर सकती है और खतरनाक रक्तस्राव तथा संक्रमण हो सकता है ।
गर्भाशय, या योनि में जड़ी-बूटियां, पौधे, या उनके रस कभी न डालें । ये उनमें
बुरी तरह से जलन पैदा कर सकते हैं, जिससे क्षति, संक्रमण या रक्तस्त्राव हो सकता है।
ब्लीच, राख, साबुन या मिटटी का तेल जैसे पदार्थों
को न पिएं और न ही, इन्हें योनि, गर्भाशय में डालें।
पारंपरिक उपचारों, या औषधियों की काफी मात्रा पी कर, या उन्हें योनि, अथवा गर्भाशय में डाल कर गर्भपात कराने
का प्रयास बिल्कुल न करें। उदाहरण के तौर पर क्लोरोक्वीन (मलेरिया की दवाई) या
प्रसव के पश्चात खून बहना रोकने के लिए दी जाने वाली दवाई अरगोमीट्रिन, ऑक्सीटोसिन की अधिक खुराक ले कर
गर्भपात कराने के प्रयास से आपकी जान भी जा सकती है।
अपने पेट के चोट पहुंचा कर, या अपने आप को सीढ़ियों से गिरा कर
गर्भपात कराने की कोशिश न करें। इससे गर्भपात तो होगा नहीं, पर आपको अंदुरुनी चोट या आतंरिक रक्त
स्त्राव अवश्य हो जाएगा ।
महत्त्वपूर्ण : न तो स्वयं अपनी योनि, या गर्भाशय में कोई वस्तु डालें और न
ही किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति को ऐसा करने दें । इससे आपकी जान जा सकती है ।
सुरक्षित गर्भपात की उपलब्धता
जब किसी महिला को अवांछित गर्भ ठहर
जाता है, तो
उसे सुरक्षित तथा क़ानूनी गर्भपात की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन
गर्भपात संबंधित कानून विभिन्न देशों में अलग-अलग हैं। भारत में एम.टी.पी. एक्ट
में गर्भपात कराने की शर्तों का उल्लेख है।
विभिन्न कारणों से गर्भपात कराना अक्सर
ही कठिन होता है। हो सकता है कि डॉक्टर तथा स्वास्थ्य कर्मियों को यह पता ही न हो
कि वास्तव में इसके बारे में कानून क्या कहता है। वे खुले रूप से गर्भपात करने के
लिए तैयार न हों, या फिर ऐसा करने के लिए काफी पैसा वसूल कर सकते हैं। हो सकता है
महिलाओं को भी यह पता न हो कि उनके देश में गर्भपात कानून स्वीकृत, या उपलब्ध है ।
भारत में 1971 में एम.टी.पी. एक्ट – 1971 ( गर्भ समाप्ति कानून- 1971) के अन्तर्गत गर्भपात को कानूनी रूप से
स्वीकार किया गया। इसके अंतर्गत उन परिस्थितियों को परिभाषित किया गया, जिनमें महिला गर्भ को समाप्त करा के
अनावश्यक मृत्यु से बच सकती है । इस कानून के अंतर्गत गर्भपात करने की अनुमति है, अगर :
(क) गर्भ को जारी रखने से महिला के
शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को खतरे की आशंका हैं ।
(ख) यह खतरा हो कि पैदा होने वाले बच्चा
गंभीर शारीरिक या मानसिक विकलांगताग्रस्त हो सकता है ।
(ग) गर्भ बलात्कार के परिणामस्वरूप हुआ
है ।
(घ) गर्भ परिवार नियोजन साधन के विफल
होने के कारण हुआ है ।
गैर कानूनी गर्भपात
कानून द्वारा निर्धारित परिसीमाओं से
बाहर किया गया गर्भपात गैरकानूनी माना जाता है । अगर गर्भपात कानूनी रूप से नहीं
किया गया है, तो
गर्भपात करने वाली महिला तथा गर्भपात करने वाले, दोनों को गिरफ्तार किया जा सकता है।
अधिकतर ऐसा नहीं होता है । लेकिन जहां गर्भपात क़ानूनी रूप से वैध नहीं है, वहां असुरक्षित गर्भधारण तथा असुरक्षित
गर्भपात के कारण अनके महिलाएं मौत का शिकार हो जाती हैं। जो धनराशि महिलाओं को
स्वास्थ्य सेवाएं की जटिलताओं का उपचार करने में लग जाती है।
गर्भ की क़ानूनी/ चिकित्सकीय समाप्ति
भारत में, गर्भ की चिकित्सकीय समाप्ति, कानूनी रूप से गर्भ के शुरू के 12 सप्ताहों में सरकार द्वारा मान्यता
प्राप्त अस्पताल या लाईसेंसशुदा चिकित्सालय में, ऐसे पंजीकृत चिकित्सक द्वारा की जा
सकती है, जिसे
प्रसूति तथा महिला रोग विषय में प्रशिक्षण प्राप्त हो । शुरू के 12 सप्ताहों में गर्भपात कराना ही
सुरक्षित रहता है । गर्भ की चिकित्सकीय समाप्ति क़ानूनी रूप से 12 सप्ताह के पश्चात, तुरंत 20 सप्ताह के पहले भी की जा सकती है ।
इसे द्वितीय त्रिमास का गर्भपात कहते हैं और यह महिलाओं के लिए अधिक जोखिमपूर्ण
होता है । इसीलिए पहले प्रसूति तथा महिला रोग विषय में प्रशिक्षण प्राप्त दो
पंजीकृत चिकित्सकों की सहमति आवशयक हैं । अगर गर्भ 20 सप्ताह से अधिक का है, तो एक केवल एक अच्छे उपकरणों वाले जिला
अस्पताल, या
उससे बड़े अस्पताल में ही किया जा सकता है । इसके लिए एक विशेष प्रक्रिया होती है ।
तदापि, वास्तविक रूप में, गर्भ की सुरक्षित रूप से चिकित्सकीय
समाप्ति के सेवाएं अनके महिलाओं को, विशेषत: ग्रामीण क्षेत्रों में, या टोक उपलब्ध ही नहीं होती हैं, अथवा वे उनका उपयोग नहीं कर पाती हैं ।
परिणामस्वरूप उन्हें गैर क़ानूनी रूप से गर्भपात कराने को विवश होना पड़ता है । जब
ये सुविधाएं उपलब्ध भी हों, तो यह महत्वपूर्ण है कि उनकी गुणवत्ता किस प्रकार की है । ये सेवाएं
महिलाओं को परिवार नियोजन के साधन अपनाने की शर्तों के साथ नहीं (जैसा की भारत में
प्राय: होता है) बल्कि मुक्त रूप से उपलब्ध होनी चाहिए ।
सुरक्षित गर्भपात कराने में अन्य
अड़चनें
चाहे कानूनी हो या गैरकानूनी, सुरक्षित गर्भपात कराना एक कठिन कार्य
हो सकता है, क्योंकि
यह महंगा, आस
पास उपलब्ध नहीं होता है, या फिर इसके बारे में नियम स्पष्ट नहीं हैं, अथवा इसके लिए अत्यधिक कागजी कार्यवाही
करनी पड़ती है । इसे सामाजिक रूप से अच्छा नहीं समझा जाता है । इसके अतिरिक्त
गर्भपात कराने वालों को एकांत और गोपनीयता नहीं मिलती हैं ।
इन कारणों से उन महिलाओं के लिए
गर्भपात सुरक्षित रूप से करना कठिन हो जाता है, जो गरीब है, या स्वास्थ्य सेवाओं से भली भांति
परिचित नहीं हैं । दुर्भाग्यवश अधिसंख्य स्थानों पर केवल वही महिलाएं सुरक्षित
गर्भपात करा पाती है, जो निजी डॉक्टर की फीस देने में समर्थ हैं ।
ऐम्नीओसेन्टीसिस
भारत में कई भागों में बच्चे का लिंग
यह निश्चित करता है कि वह जीएगा, या मरेगा । गर्भस्थ भ्रूण का लिंग पता करने के बाद गर्भपात तथा महिला
भ्रूण हत्या जैसी अवैध क्रियाएं निष्पादित की जाती हैं । कई स्थानों पर लड़कियों को
जन से तुरंत बाद मार दिया जाता है । अन्य अनके मामलों में गर्भस्थ शिशु का एक ऐसा
विधि- ऐम्नीओसेन्टीसिस द्वारा लिंग पता कर लिया जाता है, जिसका, आम तौर पर गर्भस्थ बच्चे की वृद्धि, स्थिति तथा स्वास्थ्य के बारे में
जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है । इस विधि में एक लंबी सिरिज और सुई
द्वारा गर्भ में शिशु के चारों ओर के एमनायोटिक द्रव्य की थोड़ी मात्रा निकल जाती
है और इसका परीक्षण कर के यह पता लगया जाता है की बच्चा अस्वाभाविक या कमजोर तो
नहीं है । इसी क्रिया के द्वारा 12 सप्ताह का गर्भ होते होते भ्रूण के लिंग का भी पता लगाया जा सकता
है। यद्यपि यह परिक्षण काफी सीमा तक सामान्य तथा अल्पविकसित शिशुओं के जन्म की
रोकथाम में समर्थ हैं, तदापि यह अनके लड़कियों के जन्म लेने से पहले ही उनकी हत्या के लिए भी
जिम्मेवार हैं। इस प्रकार, ऐम्नीओसेन्टीसिस का आजकल गर्भस्थ शिशु का लिंग पता करने के लिए
दुरूपयोग किया जाता है ।
अल्ट्रासाउंड
अल्ट्रासाउंड एक और परिक्षण है, जिसका गर्भस्थ शिशु का लिंग ज्ञात करने
के लिए दुरूपयोग किया जाता है, विशेषत: उस अवधि में, जब ऐम्नीओसेन्टीसिस से ऐसा संभव न हो।
ऐसे परीक्षणों की लिखित रिपोर्ट भी नहीं दी जाती है। क्योंकि अल्ट्रासाउंड एक
अनाक्रमक परिक्षण है, इसलिए यह काफी लोकप्रिय होता जा रहा है।
यह ध्यान रखने योग्य बात है कि कानूनी
रूप से भारत में “प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक(रेगुलेशन एंड प्रिवेशन आफ मिसयूज)
एक्ट -1994 “ के
अन्तर्गत जन्म से पहले गर्भस्थ शिशु का लिंग ज्ञात करना अपराध है।
गर्भपात कराने का निर्णय लेना
गर्भपात कराने का आपका निर्णय प्राय:
इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके क्षेत्र में सुरक्षित गर्भपात कराने की सुविधाएं
उपलब्ध हैं,या
नहीं। यह इस पर भी निर्भर करता है कि गर्भपात, या पैदा होने वाला बच्चा आपके जीवन को
किस प्रकार प्रभावित करेगा ।
इन प्रश्नों पर विचार करने से आपको
निर्णय लेने में सहायता मिलेगी :
क्या आप आने वाले बच्चे का ठीक से ध्यान
रख पाएंगी ?
क्या आपके पास उस बच्चे को पालने के
लिए पर्याप्त पैसा है ?
क्या गर्भधारण से आपके स्वास्थ्य को
कोई खतरा है ?
क्या आपके पति ऐसे हैं, जो बच्चे के पालन-पोषण में आपका हाथ
बटायेंगे ?
क्या आप अपने निर्णय के बारे में उससे
चर्चा कर सकती हैं ?
क्या आपका धर्म, या परिवार गर्भपात के खिलाफ है ? अगर हाँ, तो गर्भपात कराने पर आपको कैसा लगेगा ?
गर्भपात किस प्रकार किया जाएगा ?
आपका गर्भ कितने सप्ताह का है ?
क्या इसकी संभावना है कि आप किसी यौन
रोग से पीड़ित हो सकती हैं ? अगर आपको लगता है कि आपको इनका जोखिम है, तो ऐसे में आपको गर्भपात कराने से पहले
उपचार कराना होगा ।
गर्भपात कराने में के समस्या, या जटिलताएं हो सकती हैं ।
अगर आपको कोई समस्या होती है, तो आप आपातकालीन सेवा के लिए कहां जा
सकती हैं और वहां कैसे पहुंचेगी ?
अगर आप किसी की गर्भपात कराने के लिए
निर्णय लेने में सहायता कर रही हैं ,तो :
ध्यान रखिए कि उसे आपकी सम्माननीय सलाह
तथा मैत्रीपूर्ण सहारे की आवश्यकता हैे। उसके इस निर्णय के बारे में किसी और को तब
तक न बताएं, जब
तक वह महिला स्वयं न चाहे ।
गर्भपात के सुरक्षित तरीके
गर्भाशय से गर्भ गिराने के लिए
प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी निम्न तरीकों का उपयोग कर सकता है :
सक्शन द्वारा गर्भपात ( वैक्यूम
एस्पिरेशन, एम.वी.ए.)
सक्शन द्वारा गर्भ गिराने के लिए एक
विशेष ट्यूब (केनुला) को, योनि तथा गर्भाशय की ग्रीवा में से गुजरते हुए, गर्भाशय में डाला जाता है और इसे
वैक्यूम मशीन से जोड़ कर गर्भ को खींच लिया जाता है । यह प्रक्रिया महिला को बेहोश
किये बिना की जा सकती है, हालांकि कभी-कभी दर्द कम करने के लिए गर्भाशय ग्रीवा में दर्द नाशक
दवाई का इंजेक्शन लगा दिया जाता है । जब वैक्यूम एस्पिरेशन हाथों से किया जाता है
तो इसे “ मैन्युल
वैक्यूम एस्पिरेशन” (एम.वी.ए.) कहते हैं । एक विशेष सीरिंग से गर्भ को बाहर खिंच लिया
जाता है।
वैक्यूम एस्पिरेशन एक सरल और सुरक्षित
तरीका है, जिसमें
केवल 5-10
मिनट लगते हैं । इसे आम तौर पर किसी अस्पताल, या स्वस्थ्य केंद्र, या डॉक्टर के दवाखाने में किया जा सकता
है । इस तरीके से गर्भपात कराना शुरू के तीन महीनों में बहुत आसान होता है, परंतु कभी-कभी इसका बाद के सप्ताहों
में भी इस्तेमाल किया जा सकता है । इस तरीके से “डाईलेशन व क्यूरेटाज (डी.एंड.सी.)” की तुलना में जटिलताएं कम होती हैं ।
कुछ स्थानों पर एम.वी.ए. का उपयोग
माहावारी की अनियमितता को ठीक करने कर लिए भी किया जाता है । महिला को यह पता भी न
हो कि वह गर्भवती है।
सिर्फ उसकी माहावारी आने में देर हो
गयी हो । इसे मासिक चक्र नियमतिकरण (एम.आर) कहते हैं ।
खुरच कर गर्भपात करना (“डाईलेशन और क्यूरेटाज”, डी.एंड सी.)
गर्भ के बचेखुचे हिस्से को क्यूरेटर
नामक एक उपकरण से खुरच कर निकाल दिया जाता है । क्यूरेटर एक चम्मच के आकार का, छोटा सा उपकरण होता है, जो विशेष रूप से गर्भाशय में डालने के
लिए ही बनाया गया है । कैनुला की तुलना में क्यूरेटर अधिक लंबा होता है और क्योंकि
यह अधिक पैना होता है, इसलिए इसे डालने से पहले गर्भाशय की ग्रीवा को चौड़ा करना आवश्यक है ।
इस प्रक्रिया में थोडा दर्द हो सकता है ।
डी. एंड सी. को करने में अधिक समय (15-20 मिनट) लगता है । यह थोड़ी दर्दनाक
प्रक्रिया है अरु वैक्यूम एस्पिरेशन के मुकाबले इसमें अधिक खर्च आता है । इसे आम
तौर पर शल्य क्रिया कक्ष में और महिला को बेहोश करने के बाद ही किया जाता है ।
औषधिय द्वारा गर्भपात (चिकित्सकीय
गर्भपात)
आजकल कुछ देशों में डोक्टरों तथा
स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा गर्भपात करने के लिए कुछ दवाईयों का उपयोग किया जाता है
। कुछ ऐसी खबरे भी मिली हैं कि वास्तव में, गर्भपात कराने के नाम पर, इन दवाईयों का दुरूपयोग किया जा रहा है
। ये मां तथा बच्चे के लिए अत्यंत खतरनाक हो सकती है

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