युक्ति योजना क्या है इसका लाभ कैसे
लेवे
परिचय
सुरक्षित गर्भपात सेवाओं के लिए
अधिकृति योजना: युक्ति योजना
युक्ति योजना के प्रमुख घटक
जिला अधिकृति कमेटी (डीएसी) का गठन
करना
डीएसी सदस्यों का उन्मुखीकरण
योजना का प्रसार
आवेदन प्रक्रिया
अधिकृत करने की प्रक्रिया के लिए निजी
स्वास्थ्य केंद्र का मूल्यांकन
प्रमाणीकरण व एमओयू पर हस्ताक्षर
युक्ति योजना के अंतर्गत निजी अधिकृत
स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा प्रदान की
जाने वाली सेवाएँ।
सेवा राशि की दर
अधिकृत राशि प्रदान करना
रिपोर्टिंग
प्रमाण – पत्र की वैधता
निगरानी व मूल्यांकन
अधिकृति को समाप्त करना
शिकायतों का निराकरण
महिलाओं में असुरक्षित गर्भपात के कारण बीमारी व मृत्यु होना एक बड़ी समस्या है।
बिहार का मातृ मृत्यु दर 312 है, जो कि राष्ट्रीय दर 254 से कहीं ज्यादा है। बिहार में हर साल
लगभग 5.8
लाख गर्भपात किए जाते हैं जिनमें से अधिकांश गर्भपात सरकारी मान्यता प्राप्त
स्वास्थ्य केन्द्रों से बाहर, अप्रशिक्षित प्रदाताओं द्वारा, अस्वास्थ्यकर परस्थितियों में किए जाते
हैं। असुरक्षित गर्भपात की संख्या में कमी आने से राज्य के मातृ मृत्यु दर में भी
कमी आ सकेगी। निम्न दो अवरोधों को दूर करने से असुरक्षित गर्भपात को रोकने में
काफी मदद मिल सकती है:
सही कीमत पर गुणवत्तापूर्ण व सुरक्षित
गर्भपात सुविधाओं की कमी
महिलाओं व समाज में गर्भपात के कानूनी
होने व समय रहते गर्भपात के निर्णय लेने संबंधी जानकारी की कमी राज्य होने वाले
गर्भपात में से काफी संख्या में निजी स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा किए जाते हैं।
बहरहाल, यह
क्षेत्र ज्यादातर विभक्त है और निर्धारित नियमों के अनुसार कम नहीं करता हैं:
ग्रामीण क्षेत्रों में
कानूनी/सुरक्षित/प्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं की कमी
सेवाओं के अधिक मूल्य
प्रदाताओं द्वारा एमटीपी अधिनियम 1971 का पालन न करना
गलत और अनुपयूक्त इलाज
बिहार सरकार, प्रशिक्षित एवं उपयुक्त निजी
स्वास्थ्य केन्द्रों को, यदि उनकी रुचि हो तो, व्यापक गर्भपात सेवाएँ प्रदान करने के
लिए अधिकृत करना चाहती है। इसके अंतर्गत प्रथम तिमाही तक की गर्भपात सेवाएँ, गर्भपात की जटिलताओं का इलाज, स्वत: (अपने आप) होने वाले गर्भपात का
इलाज तथा दूसरी तिमाही के गर्भपात केसों व उनकी जटिलताओं संबंधी इलाज के लिए हालत
को स्थिर करके रेफर करना तथा सरकार से निर्धारित सेवा दर के अनुसार राशि/शुल्क
प्राप्त करना आता है। बिहार सरकार ने निजी स्वास्थ्य प्रदाताओं से पारदर्शी रूप में उनकी सेवाएँ
खरीदकर इन सेवाओं के इच्छुक लोगों तक ये सेवाएँ पहूँचाने के लिए अधिकृत योजना बनाई
है।
एमटीपी प्रामाणित निजी अलाभकारी गैर
सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों तथा वे परिवार
कल्याण सेवा केंद्र, जो कि एमटीपी प्रमाणित हैं, वे युक्ति योजना के अंतर्गत अधिकृति के
लिए योग्य है। इन केन्द्रों पर मुफ्त में प्रथम तिमाही तक के गर्भपात, सेवाएँ, व गर्भपात के बाद की जटिलताओं संबंधी
इलाज के लिए रेफरेल सुविधा प्रदान करेगा।
महिलाओं में समय रहते गर्भपात संबंधी
निर्णय लेने तथा यदि आवश्यकता है तो फिर तिमाही में ही गर्भपात कराने पर जोर देने
के लिए इन अधिकृत केन्द्रों को केवल प्रथम तिमाही तक के गर्भpatपात के लिए ही अधिकृत किया जाएगा।
बिहार सरकार इन अधिकृत स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा अपेक्षित दस्तावेज व केस का
विवरण जमा करने पर हर केस के आधार पर शुल्क प्रदान करेगी। इस शुल्क की दर में
दवाईयों का मूल्य, अन्य वस्तुएं का मूल्य, अन्य लागत व सेवा प्रदाता का शुल्क
शामिल होगा। जहाँ भी संभव होगा, निजी स्वास्थ्य केंद्र, महिला के साथ आने वाली सामुदायिक
स्वास्थ्य कार्यकर्त्ता (आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता) को आवागमन का
खर्चा भी देंगे।
वह सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जहाँ गर्भपात के लिए प्रशिक्षित डॉक्टर
उपलब्ध हैं, सुरक्षित
गर्भपात सेवाएँ प्रदान करते रहेंगे। सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध मुफ्त गर्भपात सेवाओं की
जानकारी समुदाय में बढ़ाने के लिए सभी केन्द्रों पर साईनेज व अन्य आइइसी सामग्री
प्रदर्शित की जाएगी। इन सभी केन्द्रों में युक्ति योजना के अंतर्गत समुदायिक
स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा/एएनएम/आंगनबाड़ी
कार्यकर्ता/ स्वास्थ्य कार्यकर्ता) को आवागमन सब्सिडी मिलेगी परंतु इन सेवाओं के
एवज में सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों को
सरकार द्वारा कोई अन्य राशि नहीं दी जाएगी।
सुरक्षित गर्भपात सेवाओं के लिए
अधिकृति योजना: युक्ति योजना
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, अधिकृति का अर्थ है वह प्रक्रिया जिसके
अंतर्गत इस अधिकृति योजना में सम्मिलित होने के इच्छुक निजी स्वास्थ्य केन्द्रों का निर्धारित मानकों पर आकलन किया
जाएगा तथा उपयुक्त स्वास्थ्य केन्द्रों को
निम्नलिखित सेवाएँ प्रदान करने के लिए मान्यता दी जाएगी और अधिकृति दिशा निर्देश
के अनुसार शुल्क प्रदान किया जाएगा।
इस योजना को युक्ति योजना का नाम दिया
गया है इसमें निम्न सेवाओं के प्रावधान हैं:
प्रथम तिमाही तक की गर्भपात सेवाएँ
अपूर्ण गर्भपात के केसों का इलाज करना
गर्भपात की जटिलताओं का इलाज व
आवश्यकता पड़ने पर रेफरल प्रदान (महिला की हालत को स्थिर करने के बाद)
दूसरी तिमाही के गर्भपात के लिए रेफर
करना
वे महिलाओं जो उपर्युक्त सेवाएँ चाहती
हैं, उन्हें
अधिकृत निजी स्वास्थ्य केंद्र द्वारा
गर्भपात के विषय में परामर्श व गर्भपात के पश्चात उचित गर्भ निरोध के साधनों के
बारे में सलाह दी जाएगी।
युक्ति योजना बिहार सरकार की निजी
स्वास्थ्य केन्द्रों को अधिकृत करने की योजना है, जिसमें सुरक्षित गर्भपात की सेवाओं की
उपलब्धि बढ़ाना व गर्भपात की जटिलताओं का इलाज करना शामिल हैं। इस योजना के अंतर्गत
अधिकृति निजी सेवा प्रदाता, बिहार की अन्य प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं का हिस्सा भी बन सकते
हैं।
युक्ति योजना के प्रमुख घटक
निम्न प्रमुख घटक हैं जिनमें अनुसार
युक्ति योजना लागू की जाएगी:
जिला अधिकृति कमेटी (डीएसी) का गठन
करना
जिला अधिकृति कमेटी में निम्न सदस्य
शामिल होंगे. :
जिला मजिस्ट्रेट इसके अध्यक्ष होंगे।
जिला स्तरीय समिति (एमटीपी कानून के
प्रावधान के अंतर्गत गठित) के सदस्य
जिले का परिवार कल्याण नोडल अधिकारी
जिला कार्यक्रम अधिकारी
डीएसी में न्यूनतम छ: व अधिकतम आठ
सदस्य होंगे। इसके प्रमुख होंगे जिला मजिस्ट्रेट। मुख्य चिकित्सा अधिकारी/जिले के
सिविल सर्जन, इसके
कार्यकारी सदस्य सचिव रहेंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी/सिविल सर्जन, जिला परिवार कल्याण नोडल अधिकारी, डीएलसी का एक सदस्य (प्रमुख रूप से
स्त्री रोग विशेषज्ञ) और डीपीएस मिलकर डीएसी की संरचना करेंगे। प्रत्येक डीएसी
बैठक में कोर समूह के सदस्यों का होना आवश्यक है।
क) डीएसी की भूमिका पर उत्तरदायित्व
यह सुनिश्चित करना कि अधिकृति योजना का
जिले में सही प्रचार किया जा रहा है व उपयुक्त निजी स्वास्थ्य केन्द्रों व सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तक इसकी सूचना पहुँच रही हैं।
अधिकृति होने की पूरी प्रक्रिया के लिए
उत्तरदायी रहना, इनमें
शामिल है आवेदन प्राप्त करना, केंद्र का मूल्यांकन, प्रमाणीकरण, संचालन, प्रगति का आकलन, संबंधित शिकायत निदान करना, दी गई सेवाओं के लिए निर्धारित राशि
दिलवाना और बिहार के राज्य स्वास्थ्य
समिति को रिपोर्ट करना।
जिला स्वास्थ्य संघ व निजी स्वास्थ्य केंद्र के बीच मेमोरेंडम
ऑफ अंडरस्टैंडिंग करना।
यदि निजी स्वास्थ्य केंद्र द्वारा
सेवाएँ सही तरीके से नहीं दी जा रही है अथवा अनैतिक कार्यों की शिकायतें आती हैं, तब उस केंद्र की अधिकृति को रद्द करना।
पहले ये तय दरों पर निजी स्वास्थ्य
केन्द्रों को उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के लिए निर्धारित समयावधि पर शुल्क
प्रदान करना ।
पहले से तय दरों में निजी
स्वास्थ्य केन्द्रों को उनके द्वारा दी
जाने वाली सेवाओं के लिए निर्धारित समयावधि पर शुल्क प्रदना करना।
त्रैमासिक बैठक के दौरान अधिकृति योजना
की प्रगति का संचालन करना व समीक्षा करना।
अधिकृति निजी स्वास्थ्य केंद्र का समय समय पर जाँच करने हेतु दौरा
करना।

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