परिवार नियोजन साधन मुख्यतः 5 प्रकार
के होते हैं :
अवरोधक साधन, जो कि शुक्राणुओं को अंडे तक पहुंचने
से रोककर गर्भ की रोकथाम करते हैं |
हार्मोन साधन, जो कि महिला के अंडाशयों से अंडे का
विसर्जन ; शुक्राणु
का अंडे तक पहुंचने की क्रिया को कठिन बनाकर और गर्भाशय की आतंरिक झिल्ली को
निषेचित अंडे के लिए प्रतिकूल बनाकर प्रभावी होता है |
आई.यू.डी.,जो कि पुरुष के शुक्राणु द्वारा महिला
के अंडे के निषेचन की रोकथाम करते हैं |
प्राकृतिक साधन, जो कि महिला को यह जानने में सहायता
करते हैं कि वह गर्भधारण कनरे योग्य हैं ताकि वह उस अवधि में सहवास कर सके |
स्थायी साधन, जो कि वे आपरेशन है जो किसी महिला या
पुरुष को बच्चा पड़ा करने के लिए लगभग पूर्ण अयोग्य बना देते हैं |
परिवार नियोजन के इन साधनों का वर्णन
किया गया है | जब
आप प्रत्येक साधन के बारे में पड़ेंगी तो शायद आपके मन में ये प्रश्न उठ सकते हैं –
यह गर्भधारण रोकने में कितना प्रभावी
है (इसकी प्रभावशीलता) ?
यह कितना सुरक्षित है ? अगर आप इस अध्याय में वर्णित स्वास्थ्य
समस्याओं में से एक से भी पीड़ित है तो आपको कुछ प्रकार कर साधनों से परहेज करना पड़
सकता है|
प्रयोग करने में यह साधन कितना आसान
हैं ?
क्या आपका साथी परिवार नियोजन अपनाने
के लिए तैयार है ?
आपकी व्यक्तिगत आवश्यकताएं व चिंताएं
क्या है ? उदहारणतया, क्या आपका परिवार पूरा हो सकता है ? क्या अप स्तनपान करा रही है ?
इस साधन की कीमत क्या है ?
क्या यह आसानी से मिलता है ? क्या आपको इसे लिए बार बार स्वास्थ्य
केंद्र जाने की आवश्यकता पड़ेगी ?
क्या इस साधन से होने वाले संभावित
दुष्प्रभाव आपके लिए कठिनाइयां उत्पन्न कर सकते हैं ?
इन साधनों के बारे में पढ़कर, आप इनमें से किसी एक को चुनने के लये
पृष्ट पर दी गई जानकारी की सहायता ले सकते हैं | किसी अन्य महिला, अपने साथी या स्वास्थ्यकर्मी से विचार
विमर्श करना भी सहायक हो सकता है | केवल आप ही यह निर्णय ले सकती हैं कि
कौन सा साधन आपके लिए सर्वोतम है |
परिवार नियोजन के अवरोधक साधन
अवरोधक साधन शुक्राणुओं को अंडे तक
पहुंचना रोक कर गर्भ की रोकथाम करते हैं | ये महिला या पुरुष के शरीर में किसी
प्रकार के परिवर्तन या दुष्प्रभाव उत्पन्न नहीं करते हैं | स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए भी ये
साधन सुरक्षित हैं | इनमें से अधिकांश साधन एच.आई.वी/ एड्स सहित एस.टी.डी से बचाव करते
हैं | जब
कोई महिला गर्भ धारण करना चाहे तो बस वह इस साधन का प्रयोग बंद कर दें |
अवरोधक साधनों में पुरुष के लिए कंडोम, महिलाओं के लिए कंडोम, डायाफ्राम तथा शुक्राणु नाशक शामिल है |
कंडोम
यह रबर की पतली झिल्ली की बनी हुई, लिंग के आकार की एक थैली होती है जिसे
पुरुष संभोग के दौरान अपने लिंग पर चढ़ा चढ़ा लेता है | चूँकि संभोग में निकलने वाले शुक्राणु
इस थैली में ही रहते हैं, इसलिए वे महिला के शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते हैं|
कंडोम को अगर शुक्राणु क्रीम के साथ
प्रयोग किया जाए तो उनकी प्रभावशाली सर्वोतम होती है लैटेक्स के बने कंडोम
एस.टी.डी व एच.आई.वी. के विरुद्ध सर्वोतम सुरक्षा प्रदान करते हैं | इनका अकेले या किसी अन्य गर्भ निरोधक
साधन के साथ प्रयोग किया जा सकता है |
कंडोम आज बाजार में व दवाईयों की दुकान
से आसानी से ख़रीदे जा सकते हैं | ये स्वास्थ्य केन्द्रों व स्वास्थ्य कर्मचारियों से भी लिए जा सकते
हैं | एड्स
रोकथाम कार्यक्रम के अन्तर्गत स्थापित डिपो धारकों से भी इन्हें प्राप्त किया जा
सकता है|कंडोम
कुछ पुरुषों में संभोग की अवधि बढ़ाने में भी सहायक होते हैं|
कंडोम का पैकेट खोलते समय ध्यान रखें
कि वह क्षतिग्रस्त न हो जाए | अगर पैकेट फटा हुआ है या पिचका हुआ है तो उसे प्रयोग न करें | चिपचिपे व सख्त कंडोम का भी प्रयोग न
करें | लिंग
पर चढ़ने से पहले उसे पूरा न खोलें |
कंडोम को लिंग पर तभी चढ़ाना चाहिए जब
वह कड़ा हो और उसने महिला के जननांगो को नहीं छुआ हो | अगर लिंग, बिना कंडोम के, महिला के जननांगों को छूता है या योनि
में प्रवेश करता है तो ऐसा करने से बिना वीर्य के स्खलन के भी, महिला गर्भवती हो सकती है और उसे
एस.टी.डी लग सकता है |
याद रखें :
संभोग की हर क्रिया के लिए एक नया
कंडोम का प्रयोग करें |
संभव हो तो केवल लैटेक्स का बना कंडोम
ही प्रयोग करें | वे एच.आई.वी के विरुद्ध सर्वोतम सुरक्षा प्रदान करते हैं |
कंडोम को हमेशा ठंडे, सूखे स्थान पर – धूप से बचाकर रखें | कटे-फाटे, पुराने पैकेटों में रखें कंडोमों के
खराब होने की आशंका रहती है |
एक कंडोम केवल एक बार ही प्रयोग करें | पहले से इस्तेमाल किये हुए कंडोम का
फिर से प्रयोग करने पर उसके फटने की आशंका रहती है |
खाद्य तेल, शिशु तेल, खनिज तेल, पेट्रोलियम जैल, त्वचा के लोशन, या मक्खन जैसे चिक्नाईयों का कंडोम के
साथ कदापि न प्रयोग करें | इनसे कंडोम फट सकता है |
हो सकता है कि शुरू में पुरुष कंडोम का
प्रयोग न करना चाहे लेकिन महिला को अपने इस पुरुष साथी को परिवार नियोजन के लाभ व
एस.टी.डी, एच.आई.वी
/एड्स से सुरक्षा का महत्त्व बताकर कंडोम प्रयोग के लिए सहमत करना चाहिए |
कंडोम का प्रयोग कैसे करें ?
अगर पुरुष की सुन्नत नहीं हुई है तो
लिंग के अगले भाग की त्वचा को पीछे करें | कंडोम के अगले भाग को एक हाथ के अंगूठे
व तर्जनी के बीच दबाकर उसमें से हवा निकल दें | उसके बाद उत्तेजित लिंग पर कंडोम को
लिंग के आखरी भाग तक चढ़ा दें |
जब कंडोम को लिंग पर चढ़ाया जा रहा हो
तो बीच-बीच में दबाकर उसमें से हवा निकालते रहें | कंडोम के सिरे पर बनी पिचकी हुई थैली
पुरुष के वीर्य को संग्रहित करेगी | अगर आप इस थैली से हवा नहीं निकालेंगे
तो बाहर निकलते समय कंडोम फट सकता है |
स्खलन के पश्चात पुरुष को कंडोम का रिम
पकड़े हुए लिंग को योनि से तभी निकालना
लेना चाहिए जब वह कड़ा हो |
कंडोम को “अनरोल” करते हुए अर्थात गोलाई में नीचे की ओर
सरकाते हुए उतारें | ऐसा करने में वीर्य को बाहर निकलने या छलकने न दें |
कंडोम को सिरे पर ठीक से गाँठ लगाकर
बांध दें और इसे जलाकर गड्ढे में दबाकर या शौचालय की फ्लश में बहा कर इसका विसर्जन
कर दें |
महिलाओं के लिए कंडोम (महिला कंडोम)
महिला कंडोम जो योनि में फिट हो जाता
है और योनि के बाहरी भग प्रकोष्ठों को ढक लेता है, संभोग से पहले कभी भी योनि में लगाया
जा सकता है | इसे
केवल एक ही बार प्रयोग करना चाहिए क्योंकि अगर इसे धोकर फिर से प्रयोग किया गया तो
यह फट सकता है |
गर्भ व एस.टी.डी जिसमें एच.आई.वी./एड्स
भी शामिल है, से
बचाव के उन साधनों में जिन पर महिला का नियंत्रण होता है, यह सर्वाधिक प्रभावी साधन है परंतु इसे
पुरुष कंडोम के साथ प्रयोग नहीं करना चाहिए |
यह काफी महंगा व प्रयोग में काफी जटिल
होता है और अभी भारत में उपलब्ध नहीं है |
महिला कंडोम का प्रयोग कैसे करें ?
पैकेट को ध्यान पूर्वक खोलें |
कंडोम के अंदरूनी रिंग के ढूंढे जो कि
उसके बंद सिरे पर होता है|
अंदरूनी रिंग को एक साथ दबाएं |
अंदुरुनी रिंग को योनि में डालें |
उंगली द्वारा अंदुरुनी रिंग को योनि की
गहराई से उपर तक धकेलें | बाहरी रिंग योनि से बाहर ही रहना चाहिए |
जब आप संभोग करें तो लिंग को बाहरी
रिंग में से गुजरने दें |
महिला कंडोम को संभोग के बाद, खड़ा होने से पहले, तुरंत बाहर निकालें | बाहरी रिंग को दबाएं व मोड़ें ताकि
पुरुष का वीर्य कंडोम के अंदर ही रहे | पुरे कंडोम को कोमलता से बाहर निकालें
और फिर उसे जला या दबा दें | इसे शौचालय में फ्लश न करें|
डायाफ्राम
डायाफ्राम नर्म रबर का बना हुआ, कम गहराई का एक कप जैसा साधन है जिसे
महिला संभोग के दौरान योनि में चढ़ा लेती है | डायाफ्राम गर्भाशय की ग्रीवा (सरविक्स)
को पूरी तरह से ढक कर, उसमें शुक्राणुओं का प्रवेश नहीं होने देता है | डायाफ्राम के साथ प्रयोग की जाने वाली
शुक्राणु नाशक क्रीम शुक्राणुओं को नष्ट करती है और गोनोरिया तथा क्लेमाइडीया ( दो
सामान्य एस.टी.डी) से भी रक्षा करती है |
डायाफ्राम विभिन्न आकारों में आते हैं
परंतु वे अधिकांश केंद्रों में उपलब्ध नहीं है | केवल ऐसा स्वास्थ्यकर्मी जो आतंरिक
(पेल्विक) परिक्षण करने में पारंगत हैं, उसका परिक्षण करके आपके लिए उपयुक्त
डायाफ्राम का सही आकार पता कर सकता है |
डायाफ्राम में, विशेषत: एक वर्ष के प्रयोग के बाद, छेद हो सकते हैं और वह कड़ा हो सकता है | आपने डायाफ्राम को समय-समय पर चैक करना
एक अच्छी आदत है | अगर उसमें कोई छेद हो जाए या वह कड़ा हो जाए तो उसे बदल दीजिए |
जब आप डायाफ्राम को शुक्राणुनाशक क्रीम
के साथ प्रयोग करें तो यह क्रीम इसमें संभोग से 6 घंटे पहले या संभोग के तुरंत
पहले लगाई जाती है |
डायाफ्राम का प्रयोग कैसे करें :
अगर आपके पास शुक्राणु नाशक क्रीम है
तो इसे डायाफ्राम के कप में लगाकर, अपनी उंगली से इसके किनारे पर फैला लें
|
डायाफ्राम को दबाकर (पिचका कर) आधा कर
लें |
दुसरे हाथ से अपनी योनि के प्रकोष्ठों
को खोलें और डायाफ्राम को योनि में डाल लें | अगर आप इसे योनि में गहराई से, कमर की दिशा की ओर रखें तो यह सर्वाधिक
प्रभावी होता है |
अपनी उंगली योनि में डालकर डायाफ्राम
की स्थिति चैक करें | डायाफ्राम की रबड़ में से गर्भाशय ग्रीवा को महसूस करें | बिना ढकी गर्भाशय ग्रीवा आपकी नाक के
सिरे जैसी सख्त महसूस होती है | डायाफ्राम द्वारा इसे पूरी तरह ढका होना चाहिए |
अगर डायाफ्राम ठीक से लगा है तो आपको
अपनी योनि में इसकी उपस्थिति का एहसास नहीं होना चाहिए |
डायाफ्राम को संभोग के 6 घंटे बाद तक
ऐसी ही स्थिति में छोड़ दें|
डायाफ्राम निकालने के लिए :
अपनी उंगली योनि में डालकर के रिम के
पीछे तक पहुंचे और इसे बाहर व नीचे की ओर खींचे | ऐसा करते समय कभी-कभी आपनी मांसपेशियों
से नीचे की ओर (जैसे कि आप शौच कर रही हो) दबाव लगाने से लाभ होता है | डायाफ्राम को हमेशा एक साफ व सूखे
स्थान पर रखें |
शुक्राणुनाशक साधन
गर्भनिरोधक फोम, गोलियां, जैली या क्रीम
शुक्राणु नाशक कई प्रकारों में उपलब्ध
है ( जैसे कि झाग (फोम), गोलियां, क्रीम या जैली) और इन्हें संभोग से तुरंत पहले योनि में रखा जाता है | शुक्राणु नाशक साधन पुरुष के
शुक्राणुओं को महिला के गर्भाशय में प्रवेश करने से पहले ही मार देता है | नोनोक्सिनोल से निर्मित शुक्राणु नाशक
दो सामान्य यौन संक्रमण रोगों, गोनोरिया तथा क्लेमाइडीया, से भी सुरक्षा प्रदान करता है |
अगर अकेले ही प्रयोग किया जाए तो
शुक्राणुनाशक अन्य साधनों की तुलना में कम प्रभावी होता है | परंतु अगर इसे किसी अन्य साधन जैसे कि
कंडोम या डायाफ्राम के साथ अतिरिक्त सुरक्षा के लिए प्रयोग किया जाए तो यह बहुत
खुजली हो सकती है |
शुक्राणु नाशकों को दवाई की दुकानों या
फार्मेसी से ख़रीदा जा सकता है | कुछ महिलाओं को इनके प्रयोग से योनि में थोड़ी खुजली हो सकती है |
शुक्राणु नाशक साधन डालें
गोलियों को संभोग से 10-15 मिनट पहले
योनि में रखना चाहिए | झाग, जैली या क्रीम सबसे अधिक प्रभावी तभी रहती है जब उन्हें संभोग से
तुरंत पहले योनि में लगाया जाए |
अगर इन्हें लगाने के बाद, संभोग 1 घंटे के बाद किया जाता है तो
और शुक्राणु नाशक साधन लगाएं | संभोग की हर क्रिया के लिए एक नई गोली, झाग, क्रीम या जैली लगाएं |
शुक्राणु नाशक साधन कैसे प्रयोग करें
आपने हाथों को साबुन पानी से अच्छी तरह
से धो लें |
झाग (फोम) को प्रयोग करने के लिए उसके
डिब्बे को तेजी से 20 बार हिलाएं | उसके बाद नोजल को दबाकर एप्लीकेटर को
भर लें | जैली
या क्रीम को प्रयोग करने के लिए शुक्राणु नाशक क्रीम की ट्यूब के मुहं पर
एप्लीकेटर को कस दें | ट्यूब को दबाकर एप्लीकेटर भर लें | योनि में गोलियों का प्रयोग करने के
लिए उन्हें पैकिंग से निकाल कर पानी से थोडा सा गिला कर लें | (गोली को मुहं में कदापि न डालें )
एप्लीकेटर को कोमलता से अपनी योनि में
डालें | जितनी
गहराई तक इसे पहुंचा सकती है , पहुंचाएं |
तत्पश्चात एप्लीकेटर के भीतर के प्लंजर
को दबाकर शुक्राणुनाशक साधन को योनि में छोड़ दें | खाली एप्लीकेटर को बाहर निकालें |
एप्लीकेटर को स्वच्छ पानी व साबुन से
धो लें |

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