स्त्रियों के सेहत की समस्याएं
स्तन का कैंसर
स्तनों का खुद ही जांच करना
पेट के निचले भाग में दर्द या परेशानी
योनी में सूजन या उभार
स्तन का कैंसर
स्त्रियों में स्तनों का कैंसर इन
दिनों काफी आम हो गया
हालाँकि स्तनों के सभी गांठ कैंसर नहीं
होते हैं
शुरू में लक्षण दिखने पर इलाज करा लेने
से मौत से बचा जा सकता है|
आप्रेशन के साथ-साथ अन्य विद्याओं से
डाक्टर कि देख-रेख में इलाज कराना चाहिए|
लक्षण
स्तन के किसी भी हिस्से में गिल्टी या
गांठ हो जाती है
कभी-कभी स्तन कि चमड़ी संतरे के छिलके
कि कई गढे वाली हो सकती है|
अक्सर इनमे दर्द नहीं होता है
स्तन में अल्सर जैसी चीज भी हो सकती है
स्तन से खून जैसा रिसाव होता है, वे अन्दर कि तरफ धंस जाती है
गिल्टी या गांठ धीरे-धीरे बढ्ती रहती
है
बाद में दर्द भी होता है|
स्तनों का खुद ही जांच करना
हर महिला को अपने स्तनों को खुद जांचना
जानना चाहिए
हर महावारी के दस दिन बाद ऐसा करना
चाहिए
आइने के सामने अपने स्तनों को देखें
ध्यान से देखें कि उनके आकार में तो
कोई फरक नहीं दिख रहा है
छूकर, धीरे-धीरे दबा कर महसूस करें कि कोई
गांठ या गिल्टी तो नहीं उभर गया है
स्तनों से कुछ लस-लसी बहाव तो नहीं हो
रहा है
जांच अच्छी तरह करें, बाहों को ऊपर उठाकर फिर नीचे झुका कर
पीठ के नीचे तकिया लगाकर लेट जाएं फिर
हाथों को सीधा कर उंगलियों से स्तनों कि धीरे-धीरे दबाएं|
स्तनों कि जांच चूची से शुरू कर के
स्तनों के आखिरी हिस्से तक दबा कर देखें
चुचियों को दबाकर देखें कि उनसे खून या
किसी तरह का बहाव तो नहीं हो रहा है|
रोज नहाएं और उन अंगों पर हल्का साबुन
लगाएं
हर संभोग के बाद पेशाब कर लें और योनी
वाले हिस्से कि सफाई करें| इससे पेशाब नली में कोई छुतहा रोग नहीं होगा|
हर शौच के बाद गुदा को साफ पानी से
धोएं|
पेट के निचले भाग में दर्द या परेशानी
यह दर्द पेशाब कि नली या आंतों कि
समस्या से भी हो सकता है
गर्भाशय में ट्यूमर या गांठ का होना
अंडाशय में पानी वाली सूजन
गर्भाशय का कैंसर
शुरू में हल्की बेचैनी होती है, फिर दर्द बढ़ जाता है
अक्सरहाँ आपरेशन कि जरूरत पड़ती है|
योनी में सूजन या उभार
ऐसी महिलाओं को यह रोग होता है जिनके
बहुत बच्चे हुए हैं या प्रसव के समय कठिनाई हुई हो
उन्हें यह महसूस होता है कि योनी बाहर
की तरफ निकल रहा है या पीछे से भार पर रहा है|
जोर से खांसने पर यह परेशानी बढ़ जाती
है
पहला बच्चा पैदा होने पर इस तरह की
परेशानी ज्यादा होती है|
ऐसी माताओं को चाहिए कि वे कम बच्चे
पैदा करें|
अनचाहा गर्भ क्या है?
अनचाहा गर्भ की स्थिति
भूमिका
सीता एक बच्चा है| उसकी उम्र एक साल की है| सीता अब भी अपने बच्चे को अपना दूध
पिलाती है| बच्चे
के जन्म के 6
माह बाद सीता की माहवारी पहले जैसी शुरू हुई| अब उसे हर माह समय से माहवारी होने लगी|
एक साल तक सब कुछ ठीक था| के माह सीता देवी की माहवारी नहीं हुई| उसने या बात अपने पति अर्जुन को बताई| दोनों बहुत चिंतित हुए| उन्हें लगा कि सीता फिर से गर्भवती हो
गई है| उनके
चिंता की वजह भी थी| इस दौरान दोनों ने ही किसी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल नही किया था|
अर्जुन और सीता ने आपस में विचार कर या
तय किया था कि दूसरा बच्चा दो साल के बाद करेंगे| वे अभी बच्चा नही चाहते थे| परन्तु सीता अब गर्भवती हो गई है| यही अनचाहा गर्भ है|
अनचाहा गर्भ की स्थिति
यदि गर्भ ठहर गया हो और पति-पत्नी गर्भ
की अवस्था को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं तो या एक अनचाहा गर्भ की स्थिति है|
हमने पूर्व में सावित्री और प्रीति की
कहानी देखी उर पढ़ी है| दोनों हो अपनी गर्भवस्था को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है| ऐसे हो बहुत से दम्पति होते है, जो गर्भावस्था को आगे नहीं बढ़ाना चाहते
है|

0 Comments
Please do not enter any spam Link in the comment box