पीलिया रोग किसे हो सकता है?

पीलिया रोग किसे हो सकता है?

 


रोग किसे हो सकता है?

यह रोग किसी भी अवस्थाक के व्याक्ति को हो सकता है। हॉं, रोग की उग्रता रोगी की अवस्थाो पर जरूर निर्भर करती है। गर्भवती महिला पर इस रोग के लक्षण बहुत ही उग्र होते हैं और उन्हे, यह ज्यारदा समय तक कष्ट‍ देता है। इसी प्रकार नवजात शिशुओं में भी यह बहुत उग्र होता है तथा जानलेवा भी हो सकता है।

बी प्रकार का वायरल हैपेटाइटिस व्या वसायिक खून देने वाले व्यसक्तियों से खून प्राप्तो करने वाले व्यपक्तियों को और मादक दवाओं का सेवन करने वाले एवं अनजान व्यवक्ति से यौन सम्बयन्धोंो द्वारा लोगों को ज्यानदा होता है।

रोग की जटिलताऍं

ज्याकदातार लोगों पर इस रोग का आक्रमण साधारण ही होता है। परन्तुह कभी-कभी रोग की भीषणता के कारण कठिन लीवर (यकृत) दोष उत्पकन्नध हो जाता है।

इस प्रकार का पीलिया (वायरल हैपेटाइटिस) ज्या दा गम्भी र होता है इसमें जटिलताएं अधिक होती है। इसकी मृत्यु  दर भी अधिक होती

उपचार

          रोगी को शीघ्र ही डॉक्टपर के पास जाकर परामर्श लेना चाहिये।

          बिस्तकर पर आराम करना चाहिये घूमना, फिरना नहीं चाहिये।

          लगातार जॉंच कराते रहना चाहिए।

          डॉक्टरर की सलाह से भोजन में प्रोटिन और कार्बोज वाले प्रदार्थो का सेवन करना चाहिये।

          नीबू, संतरे तथा अन्य  फलों का रस भी इस रोग में गुणकारी होता है।

          वसा युक्त  गरिष्ठा भोजन का सेवन इसमें हानिकारक है।

          चॉवल,  दलिया,  खिचडी,  थूली,  उबले आलू,  शकरकंदी,  चीनी,  ग्लूयकोज,  गुड,  चीकू,  पपीता,  छाछ,  मूली आदि कार्बोहाडेट वाले प्रदार्थ हैं इनका सेवन करना चाहिये।

रोग की रोकथाम एवं बचाव

पीलिया रोग के प्रकोप से बचने के लिये कुछ साधारण बातों का ध्याकन रखना जरूरी हैः-

          खाना बनाने, परोसने, खाने से पहले व बाद में और शौच जाने के बाद में हाथ साबुन से अच्छीो तरह धोना चाहिए।

          भोजन जालीदार अलमारी या ढक्कसन से ढक कर रखना चाहिये, ताकि मक्खियों व धूल से बचाया जा सकें।

          ताजा व शुद्व गर्म भोजन करें दूध व पानी उबाल कर काम में लें।

          पीने के लिये पानी नल, हैण्डीपम्पम या आदर्श कुओं को ही काम में लें तथा मल, मूत्र, कूडा करकट सही स्थापन पर गढ्ढा खोदकर दबाना या जला देना चाहिये।

          गंदे, सडे, गले व कटे हुये फल नहीं खायें धूल पडी या मक्खियॉं बैठी मिठाईयॉं का सेवन नहीं करें।

          स्वेच्छस शौचालय का प्रयोग करें यदि शौचालय में शौच नहीं जाकर बाहर ही जाना पडे तो आवासीय बस्ती  से दूर ही जायें तथा शौच के बाद मिट्टी डाल दें।

          रोगी बच्चों  को डॉक्टिर जब तक यह न बता दें कि ये रोग मुक्ता हो चूके है स्कूपल या बाहरी नहीं जाने दे।

          इन्जेबक्शोन लगाते समय सिरेन्ज  व सूई को 20 मिनट तक उबाल कर ही काम में लें अन्यनथा ये रोग फैलाने में सहायक हो सकती है।

          रक्ते देने वाले व्यलक्तियों की पूरी तरह जॉंच करने से बी प्रकार के पीलिया रोग के रोगवाहक का पता लग सकता है।

          अनजान व्याक्ति से यौन सम्पसर्क से भी बी प्रकार का पीलिया हो सकता है।


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