पीलिया
रोग-कारण एवं निदान
1. परिचय
2. रोग का प्रसार कैसे?
3. रोग कहॉं और कब?
4. रोग के लक्षण
5. पीलिया रोग के कारण
6. रोग किसे हो सकता है?
7. रोग की जटिलताऍं
8. उपचार
9. रोग की रोकथाम एवं बचाव
10. स्वाोस्य्िद
कार्यकर्ता ध्यारन दें
परिचय
वायरल
हैपेटाइटिस या जोन्डिस को साधारण लोग पीलिया के नाम से जानते हैं। यह रोग बहुत ही
सूक्ष्म विषाणु(वाइरस) से होता है। शुरू
में जब रोग धीमी गति से व मामूली होता है तब इसके लक्षण दिखाई नहीं पडते हैं, परन्तुह जब यह उग्र रूप धारण कर लेता
है तो रोगी की आंखे व नाखून पीले दिखाई देने लगते हैं, लोग इसे पीलिया कहते हैं।
जिन
वाइरस से यह होता है उसके आधार पर मुख्य तः पीलिया तीन प्रकार का होता है वायरल
हैपेटाइटिस ए, वायरल हैपेटाइटिस बी तथा वायरल
हैपेटाइटिस नान ए व नान बी।
रोग
का प्रसार कैसे?
यह
रोग ज्याादातर ऐसे स्थाटनो पर होता है जहॉं के लोग व्याक्तिगत व वातावरणीय सफाई पर
कम ध्यारन देते हैं अथवा बिल्कुाल ध्यासन नहीं देते। भीड-भाड वाले इलाकों में भी
यह ज्याेदा होता है। वायरल हैपटाइटिस बी किसी भी मौसम में हो सकता है। वायरल
हैपटाइटिस ए तथा नान व नान बी एक व्यडक्ति से दूसरे व्यजक्ति के नजदीकी सम्प र्क
से होता है। ये वायरस रोगी के मल में होतें है पीलिया रोग से पीडित व्येक्ति के मल
से, दूषित जल, दूध अथवा भोजन द्वारा इसका प्रसार होता है।
ऐसा
हो सकता है कि कुछ रोगियों की आंख, नाखून
या शरीर आदि पीले नही दिख रहे हों परन्तुक यदि वे इस रोग से ग्रस्त हो तो
अन्यख रोगियो की तरह ही रोग को फैला सकते हैं।
वायरल
हैपटाइटिस बी खून व खून व खून से निर्मित प्रदार्थो के आदान प्रदान एवं यौन क्रिया
द्वारा फैलता है। इसमें वह व्यटक्ति हो देता है उसे भी रोगी बना देता है। यहॉं खून
देने वाला रोगी व्याक्ति रोग वाहक बन जाता है। बिना उबाली सुई और सिरेंज से
इन्जेसक्शबन लगाने पर भी यह रोग फैल सकता है।
पीलिया
रोग से ग्रस्तऔ व्यइक्ति वायरस, निरोग
मनुष्यग के शरीर में प्रत्यगक्ष रूप से अंगुलियों से और अप्रत्यंक्ष रूप से रोगी
के मल से या मक्खियों द्वारा पहूंच जाते हैं। इससे स्व स्य् मन मनुष्यं भी रोग
ग्रस्तअ हो जाता है।
रोग
कहॉं और कब?
एक
प्रकार का पीलिया तथा नान ए व नान बी पीलिया सारे संसार में पाया जाता है। भारत
में भी इस रोग की महामारी के रूप में फैलने की घटनायें प्रकाश में आई हैं। हालांकि
यह रोग वर्ष में कभी भी हो सकता है परन्तुी अगस्तर, सितम्बनर व अक्टू बर महिनों में लोग इस रोग के अधिक शिकार होते हैं।
सर्दी शुरू होने पर इसके प्रसार में कमी आ जाती है।
रोग
के लक्षण
एक
प्रकार के पीलिया और नान ए व नान बी तरह के पीलिया रोग की छूत लगने के तीन से छः
सप्ता ह के बाद ही रोग के लक्षण प्रकट होते हैं।
दूसरे
प्रकार के पीलिया (वायरल हैपेटाइटिस) के रोग की छूत के छः सप्ताकह बाद ही रोग के
लक्षण प्रकट होते हैं।
पीलिया
रोग के कारण
• रोगी को बुखार रहना।
• भूख न लगना।
• चिकनाई वाले भोजन से अरूचि।
• जी मिचलाना और कभी कभी उल्टियॉं होना।
• सिर में दर्द होना।
• सिर के दाहिने भाग में दर्द रहना।
• आंख व नाखून का रंग पीला होना।
• पेशाब पीला आना।
• अत्यबधिक कमजोरी और थका थका सा लगना

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