महिला स्वास्थ्य एवं एच.आई.वी./एड्स Women's
Health and HIV/AIDS
भूमिका
एड्स एक समस्या
महिला स्वास्थ्य एवं एच.आई.वी./एड्स
एच.आई.वी.
एड्स
एच.आई.वी. रक्त परीक्षण
एच.आई.वी. और एड्स के साथ सकारात्मक
जीवन
अगर आपका साथी एच.आई.वी. संक्रमित है
तो
दवाइयों के प्रयोग से कुछ संक्रमणों की
रोकथाम
आप एड्स की रोकथाम में किस प्रकार
सहायता कर सकते हैं
भूमिका
अभी तक आपने रेडियो , टेलीविजन पर, बाजार में, अपने पड़ोसियों से या स्वास्थ्य केंद्र
में एड्स के बारे में जरुर सुन लिया होगा । आप शायद सोच सकती हैं कि एड्स आपकी
समस्या नहीं है । तभी भी, लाखों लोग एड्स विषाणु से संक्रमित हैं । इनमें महिलाओं की संख्या
दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है ।
हम एड्स से अपनी रक्षा तभी कर सकते हैं
जब हम यह समझें कि एड्स क्या है और यह कैसे फैलता है । हमें यह भी अवश्य समझना
चाहिए कि गिरते हुए सामाजिक मूल्यों, बढ़ती हुई गरीबी तथा इस रोग का अपास में
क्या संबंध हैं, इस
रोग के बारे में खुले रूप से चर्चा करने से इसको कैसे नियंत्रित किया जा सकता है
और इस रोग के कारण हमारे समाज, परिवारों तथा मित्रों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है ?
भारत में एच.आई.वी. से संक्रमित हर चौथा व्यक्ति एक
किशोर है । इसलिए यह अति महत्वपूर्ण है कि हम एक सही सामाजिक परिवेश का निर्माण
करें ताकि युवा जन आपसी संबंधों से बचने की आवश्यकता को समझ सकें । समाज को भी कड़ाई का रुख अपनाकर, उन लोगों का पर्दाफाश व दंडित करने के
लिए कटिबद्ध होना चाहिए जो युवा लोगों का यौनिक रूप से शोषण व उत्पीडन करते है ।
एड्स एक समस्या
भारत में एच.आई.वी. की महामारी लगभग 16 वर्ष पुरानी है और लगभग सभी प्रदेशों
तथा केंद्र शासित प्रदेशों से एच.आई.वी. संक्रमणों की रिपोर्ट मिली है । 75 प्रतिशत संक्रमण यौन संबंधों के
माध्यम से, 8
प्रतिशत खून चढ़ावाने के द्वारा तथा अन्य प्रतिशत सुई के द्वारा नशीली दवाइयों के
माध्यम से होने की रिपोर्ट है ।
10 वर्ष पहले ऐसा लगता था कि महिलाओं को
यौन, यौनिक
स्वास्थ्य, यौ.सं.रोगों
तथा एड्स से रक्षा के प्रति शिक्षित करना अति आवशयक है । इस बात पर जोर देना भी
आवश्यक है कि महिलाएं कोई भोग व कामक्रिया की वस्तु नहीं हैं और शारीरिक संबंध
हमेशा एक ऐसे गहरे संबंध का भाग होने चाहिए जो आपसी सम्मान, देखभाल, प्यार व समझ पर आधारित हैं ।
महिला स्वास्थ्य एवं एच.आई.वी./एड्स
एड्स अब विश्व के उन भागों में तेजी से
फैल रहा है जहां लोग गरीब और अशिक्षित हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में विकास तथा
रोजगार के अवसर नहीं के बराबर होने से, जब भोजन व पानी का आभाव हो जहां युद्ध
या अन्य किसी कारणवश अशांति होती हैं तो लोगों को भारी संख्या में अपना घर छोड़ने
के लिए मजबूर होना पड़ता है । प्राय: पुरुष अकेले ही काम की तलाश में शहर जाते हैं
। वहां जाकर उन्हें एक बिल्कुल ही नया माहौल मिलता है जहां टेलिविजन, फिल्मों जैसे माध्यम महिला को आनंद व
भोग की वस्तु के रूप में दिखाकर उस पर एक शक्तिशाली प्रभाव डालते हैं । इन
परिस्थितियों में अच्छी परम्पराएं तथा व्यवहार भी टूट जाते हैं । पुरुषों की अन्य
साथियों के साथ आकस्मिक या व्यवसायिक यौन संपर्क बनाने की संभावना अधिक रहती है ।
महिलाओं के लिए सामंजस्य बनाना विशेष
रूप से कठिन होता है । गरीब महिलाओं के अपना जीवन नियंत्रण करने के शक्ति वैसे ही
काफी कम होती है । उनके पास अपना गुजर बसर कनरे के शिक्षा व दक्षता का आभाव होता
है, उन्हें
अपने शरीर व स्वास्थ्य के बारे में ज्ञान का आभाव होता है और उन्हें परिवार के
अन्य सदस्यों का सहारा व सुरक्षा भी नही मिलती है । लड़कियों तथा महिलाओं के अवैध
व्यापार के साथ-साथ यौनिक हिंसा में भी वृधि हो रही है । इसके साथ पहले से ही
संक्रमित यौन साथियों से एड्स संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ रहा है ।
एच.आई.वी. नंगी आखों से न दिख सकने
वाला एक सूक्ष्म विषाणु (वायरस) है । एड्स वह बीमारी है जो एच.आई.वी. से संक्रमित
व्यक्ति में बाद में विकसित होती है ।
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