स्त्री के शरीर की रचना और माहवारी जानकारी

स्त्री के शरीर की रचना और माहवारी जानकारी

स्त्री के शरीर की रचना और माहवारी

 

 

भूमिका

माहवारी से सम्बन्धित जानकारी

भूमिका

स्त्री के प्रजनन तंत्र को हम दो भागों में बाँट सकते हैं एक बाहरी और दूसरा अंदरूनी| गुप्तांग (जिसे भग भी कहा जाता है) और योनि, स्त्री के प्रजनन तंत्र का बाहरी भाग बनाते हैं| इसे स्त्री शीशे की सहायता से स्वयं भी देख सकती है| भग में मौजूद अंदरूनी और बाहरी तहें (भगोष्टि) योनि द्वार की सुरक्षा का काम करती हैं| कुवांरी स्त्री में एक पतली झिल्ली योनि द्वार को बंद रखती है| संभोग, चोग लगने या कुछ और कारणों से यह झिल्ली नष्ट हो जाती है| झिल्ली नष्ट हो जाने पर योनि द्वार खुल जाता है| भग के अंदरूनी ओष्टों पर एक घुण्डी जैसा छोटा सा पिंड होता है| उतकों से बना या पिंग भग शिशन (क्लाइटोरिस) कहलाता है और योनि छिद्र की सीध में होता है| भग शिशन में उत्तेजित होने की क्षमता होती है| सहवास के समय या स्त्री में कामोत्तेजना पैदा करता है| इसके ठीक नीचे पेशाब की नली का द्वार होता है और इसके ठीक नीचे योनि छिद्र|

 

माहवारी से सम्बन्धित जानकारी

अंदरूनी भगोष्ट के अंदर कई ग्रंथियाँ होती हैं जिनसे एक प्रकार का तरल पदार्थ निकलता है| यह योनि को चिकना बनाता है| इनमें से दो ग्रंथियाँ कुछ बड़ी होती हैं| यह बार्थोलिन ग्रंथियाँ कहलाती है| इनमें संक्रमण हो जाए तो यह फूल कर दुखने लगती हैं|

 

योनि एक रास्ता है जो बाहरी गुप्तांग (भग) से जनन तंत्र के अंदरूनी अंगों की ओर जाता है| इस रास्ते में पर्याप्त जगह होती है| संभोग के समय पुरुष का जनन अंग (शिशन) इसी में प्रवेश करता है| उस योनि मार्ग की लचीली दीवारों की पकड़ होती है| प्रसव के समय बच्चा भी योनि मार्ग से ही बाहर आता है| इसलिए इसे जनन मार्ग भी कहते हैं| किसी महिला की अंदरूनी जाँच करते समय डॉक्टर योनि में स्पेकुलम (जाँच करने का औजार) डालते हैं| इससे उन्हें अंदर की स्थिति देखने में आसानी होती है| स्पेकुलम द्वारा जाँच से अंदरूनी अंग जिस प्रकार दिखाई देते हैं उसे चित्र में देखा जा सकता है| एक बड़ी घुण्डी के आकार की रचना दरअसल गर्भाशय का मुख है| इसे स्त्री के अंदरूनी जनन तंत्र का द्वार कह सकते हैं|

 

रजोनिवृत्ति सम्बन्धी समस्याएँ

 

 

रजोनिवृत्ति सम्बन्धी समस्याएँ

माहवारी के अलावा दूसरे रक्तस्राव

गर्भाशय में रक्तस्राव

किसी आघात के कारण होने वाला रक्तस्राव

याद रखें

रजोनिवृत्ति सम्बन्धी समस्याएँ

45 से 50 वर्ष की आयु होने पर माहवारी स्वाभाविक रूप से बंद हो जाती है| इसे रजोनिवृत्ति कहते हैं| पहले रक्त कुछ कम होता है और अनियमित भी हो जाता है| इसके बाद धीरे-धीरे एक समय ऐसा आता है कि उह पूर्ण रूप से बंद हो जाता है| माहवारी बंद इसलिए होती है कि अब डिम्ब ग्रंथियों से डिम्ब उत्सर्ग होना बंद हो जाता है| हार्मोनों का स्राव भी कम हो जाता है| डिम्ब ग्रंथियों से डिम्ब उत्सर्ग नहीं होता इसलिए महिला गर्भवती नहीं हो सकती | ई और पी हार्मोनों का स्तर गिरने लगता है| परन्तु ई की कुछ मात्रा बनी रहती है| इसी के कारण महिलाओं का मीठा स्वर, चहरे पर बालों का न होना, स्तनों और नितम्बों की गोलाई जैसे गुण बने रहते हैं| रजोनिवृत्ति के समय अक्सर महिलाओं को कोई कष्ट नहीं होता| कुछ साधारण समस्याएँ सामने आती हैं जिनमें थकन, मायूसी और चिड़चिड़ापन शामिल हैं| कुछ दिनों बाद यह अपने आप दूर हो जाती हैं| इन दिनों महिला के पति और दूसरे परिवार जनों को उस समझना और सहारा देना चाहिए| महिला और उसके परिवार को समझाइए कि यह समस्याएँ स्वाभाविक हैं और जल्द ही दूर हो जाएँगी|

 

परन्तु कुछ स्त्रियों को कुछ असमान्य कष्ट हो सकते हैं| उदाहरण के तौर पर अत्यधिक पसीना आना, एकाएक गर्मी लगना, ह्रदय की धड़कन बढ़ जाना, छाती में दर्द, हाथ पैरों का सुन्न होना, झुनझुनी, संभोग की बढ़ी हुई इच्छा, वजन बढना, कान बजना, पेट में गैस, कब्ज आदि| यह कष्ट भी कुछ महीनों बाद दूर हो जाते हैं| अगर महिला इनके लिए डॉक्टर की सलाह चाहती है तो उसे सूर्या क्लिनिक भेज दीजिए|

 

माहवारी के अलावा दूसरे रक्तस्राव

कुछ महिलाओं को दो माहवारी के बीच के समय में खून जा सकता है| रजोनिवृत्ति के बाद भी रक्तस्राव हो सकता है| इसे अनदेखी न करें और गंभीरतापूर्वक लें| रक्तस्राव किसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है इसलिए महिला को जल्दी से जल्दी सूर्या क्लिनिक भेज कर डॉक्टरी सलाह दिलवाएं|

 

गर्भाशय में रक्तस्राव

गर्भ के किसी भी महीने में खून जाना (प्रसव का समय आ जाने की स्थिति को छोड़ कर) एक गंभीर समस्या है| गर्भ के 28 सप्ताह के अन्द्र्ट होने वाला रक्तस्राव गर्भपात का सूचक होता है| यदि 28 सप्ताह के बाद रक्तस्राव हो तो यह आंवल के गलत स्थान पर होने या किसी आघात के कारण पाने स्थान से अलग हो जाने के कारण हो सकता है| इस स्थिति में महिला को तुरंत सूर्या क्लिनिक भेज दें|

 

किसी आघात के कारण होने वाला रक्तस्राव

कुंवारी कन्या में योनि या योनि के अंदर की झिल्ली को संभोग के कारण आघात पहुँचने से खून जारी हो सकता है| योनि की झिल्ली फटने से होने वाला रक्तस्राव कोई गंभीर समस्या नहीं है| यह स्वयं जल्द ही रुक जाता है| इस कारण यह होता है कि यह झिल्ली बहुत पतली होती है जो पहले संभोग से नष्ट हो जाती है| कभी-कभी यह खेल कूद या किसी और प्रकार की चोट से भी फट सकती है| साइकिल चलाना, टट्टू की सवारी करना या कोई भारी मेहनत का काम कारण बन सकता है| इसलिए झिल्ली का न होना कन्या के कुंवारी न होने का सबूत नहीं हो|

 

जबरदस्ती संभोग करने से चाहे वह पत्नी के साथ हो या किसी और स्त्री के साथ, योनि को आघात पहुँच सकता है| इससे भारी रक्तस्राव हो सकता है| बलात्कार से योनि को चोट पहुँचाना बहुत आम है इसलिए कि बलात्कार स्त्री की मर्जी के खिलाफ होता है| पुरुष इसके लिए बलपूर्वक उसके शरीर में प्रवेश करता है| ऐसी किसी भी स्थिति में महिला को तुरन्त निकट के किसी सरकारी अस्पताल भेजें|

 

याद रखें

माहवारी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है| इसमें अशुद्ध होने वाली कोई बात नहीं| इसके लिए महिला को अलग न करें| अलग थलग करना महिला के लिए बड़ा असुविधा जनक होता है|

अगर 16 वर्ष की आयु तक किसी लड़की को माहवारी न हो तो उसे सूर्या क्लिनिक भेजें|

माहवारी के दौरान कमर या पेट में दर्द हो तो निवारक की गोलियां दें|

माँओं और लड़कियों को मासिक रुक जाने का महत्व बताएं| मासिक का रुकना गर्भ ठहरने के कारण हो सकता है| इसकी ओर ध्यान दें|

माहवारी का रक्त सोखने के लिए साफ गद्दियाँ या तह किया हुआ साफ कपड़ा लेना जरुरी है| इससे कई जनन रोगों की रोकथाम होती है|

योनि से किसी भी असामान्य रक्तस्राव के होने पर महिला को जल्द से जल्द सूर्या क्लिनिक भेजें|

अगर अप को बलात्कार का शक हो तो महिला को तुरंत किसी सरकारी अस्पताल भेजें|

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