रक्षा बंधन क्यों मनाते हैं? Why celebrate Raksha Bandhan?

रक्षा बंधन क्यों मनाते हैं? Why celebrate Raksha Bandhan?

रक्षा बंधन क्यों मनाते हैं?



त्योहार दो शब्दों से बना है🔔

त्यो +हार

त्यो का अर्थ है तुम्हारी और हार का अर्थ है हार या पराजय

इस प्रकार से त्योहार का अर्थ है तुम्हारी पराजय

हिन्दू धर्म के सभी त्योहार भारत के मूलनिवासियों के महापुरुषों की हत्या और उस पर मनाया गया जश्न है जिसे मूलनिवासी शूद्र (OBC, SC, ST) और महिलाएं अज्ञानतावश मनाते आये हैं।

रक्षा बंधन गुलामी की पहचान है

प्रश्न - बांधते किसे हैं?

जबाब - जानवरों और गुलामों को

प्रश्न - भाई क्या है??

जबाब - गुलाम??या जानवर?

बहनें अज्ञानतावश अपने भाई को राखी बांधकर गुलाम होने की एहसास कराती है।

रक्षा बंधन कब से??

भारत का मूल धर्म श्रमण धर्म था मौजूदा उत्तर प्रदेश के बलिया जिला जिसे श्रमण सम्राट बाली के नाम पर बलिया पड़ा था।

बाली बहुत ही वीर और दानी सम्राट था श्रमण मास की पूर्णिमा को हर साल राजा बाली दान देता था  ब्राह्मणों ने सम्राट बाली से कई बार युद्ध किया लेकिन कभी जीत नहीं पाये इतिहास गवाह है कि आमने सामने की लड़ाई में सवर्ण हमेशा ही हारे हुए हैं।

कृष्ण नामक ब्राह्मण जिसे पाली भाषा में बामन कहते थे श्रमण सम्राट बाली से ठगी करके की योजना बनाई और श्रमण पूर्णिमा को राजा बाली से दान मांगने गया और अपनी कूटनीति के तहत राजा बाली से तीन बचन ले लिया चूंकि श्रमण राजा अपने जबान के पक्के होते थे जो जबान दे दिया उसको पूरा करते थे।

बामन कृष्ण ने राजा बाली से तीन बचन लेकर दान में तीन वस्तुएं मांग किया है।

1- शिक्षा का अधिकार

2-शस्त्र का अधिकार

3-सम्पति का अधिकार

चूंकि राजा बचन दे चुके थे इसलिए बामन को तीनों अधिकार दान में दे दिया।

जब सम्राट बाली से तीनों अधिकार बामन कृष्ण को दे दिया तब  कृष्ण ने बाली को गुलाम बना लिया और बामन इंद्र को बाली के राज्य पर कब्जा करने के लिए युद्ध करने के लिए बुलाया उस समय इंद्र की पत्नी जो कि डरती थी कि कहीं इंद्र मारा ना जाये और अगर मारा गया और सिर कट गया तो मै कैसे पहचान करूंगी इसलिए पहचान बनाने के लिए इंद्र के हाथ में धागा बांध दिया था।

लड़ाई में इंद्र जीत गया क्योंकि राजा बाली से शस्त्र रखने का अधिकार छीन लिया था।

तभी से लड़ाई के समय जाते समय महिलाएं अपने पति के हाथ में धागा बांधने लगी थी।

ब्राह्मणों ने अपनी कमाई का जरिया बनाने के लिए राजाओं के हाथ में धागा बांधने लगे जिसे रक्षा सूत्र नाम दिया

हाथ में धागा बांधते समय ब्राह्मण एक मंत्र पढ़ता है

येन बदधो दान बेदरो राजा बाली महाबलम

तेन तवाम बधनामि मम रक्षे मा चल मा चल मा चल

अर्थात जिस प्रकार से तुम्हारे राजा बलि को मैने गुलाम बनाया था ठीक उसी प्रकार से तुम मेरे गुलाम हो मेरी रक्षा करना तुम्हारा कर्तव्य है मै तुम्हारी हत्या करूंगा भागना नहीं भागना नहीं।

इस प्रकार से रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है जिसमें ब्राह्मण और बनिया कमाते हैं ब्राह्मण और बनिया ही आजकल मिठाई और राखी की ज्यादा से ज्यादा दुकानें चलाते हैं और शूद्र (OBC, SC, ST) के लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवाते है और गरीबी की मार झेलते है।

हमें अपनी बेटियों और बहनों को कमजोर नहीं मजबूत बनाना है और लड़की लड़का एक समान है इस सिद्धांत को अपनाना है।

बेटियां अपनी रक्षा खुद कर सकती है इसलिए उच्च और सही सामाजिक ज्ञान देने की आवश्यकता है हमें अपनी बेटियों को तथागत गौतमबुद्ध और सिंबल आफ नालेज बाबा साहब डॉ आंबेडकर के विचारों को पढाना है।

 

बहुत ही कड़वी परन्तु सत्य जानकारी है।

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