परशुराम ने 21 बार धरती को क्षत्रिय शून्य किया,
इस बात को लेकर ब्राह्मण गर्व करते है। महात्मा गांधी
जी की बात जो मुझे समझ आती है वह यह कि आज जो हिंदुओं की एकता बात मुसलमानों को सबक
सिखाने की बात करते है, निश्चय ही कल को आपस में भी लड़ेंगे। ब्राह्मण क्षत्रिय के
साथ। क्षत्रिय, ब्राह्मण और वैश्य दलितों के साथ। इसीलिए हम सब को भाईचारे से ही रहना
होगा। नफरत फैलाने वाले देश व समाज के दुश्मन हैं।
खैर परशुराम
ने जब एक बार धरती को क्षत्रिय से शून्य कर दिया तो दूसरी बार के लिए क्षत्रिय कहां
से आए ? दूसरी बार धरती को क्षत्रिय से शून्य कर दिया फिर तीसरी बार क्षत्रिय कहां
से आए ? और ऐसा 21 बार ? यह सवाल सोशल मीडिया में उठाया जाता है। कोई इसका जवाब नहीं
देता। मैने हिन्दू धर्म ग्रंथो से पढ़ कर जो जानकारी प्राप्त की वह निम्न प्रकार है
:-
परशुराम
का जन्म :- एक था राजा गाधि , उसकी कन्या सत्यवती, सत्यवती का विवाह हुआ भृगु के पुत्र
ऋचिक से। ऋचिक ने अपनी पत्नी और अपनी सास को पुत्र पैदा करने के लिए चरु ( पकाया हुआ
अन्न ) तैयार किया । एक अपनी सास के लिए जिसको खाकर उसकी सास क्षत्रिय शिरोमणि पुत्र पैदा करती और दूसरा
अपनी पत्नी के लिए जिसको खा कर श्रेष्ठ ब्राह्मण
पैदा करना था। ( राम इत्यादि चारो भाई भी इनकी माताओं द्वारा खीर खाने से पैदा हुए
थे ) । लेकिन गलती से या जानबूझ कर मां बेटी ने चरु बदल लिया।
जब ऋचिक को पता लगा तब उसने अपनी पत्नी को
कहा कि चरु बदलने से तुझे पैदा तो ब्राह्मण ही होगा लेकिन गुण उसमे खतरनाक क्षत्रिय
वाले होंगे। इसपर उसकी पत्नी सत्यवती ने उपाय पूछा तो ऋचिक ने कहा कि बेटा तो ब्राह्मण
होगा लेकिन अब पोता क्षत्रिय गुण वाला खतरनाक होगा। तब सत्यवती के पैदा हुआ जमदग्नि और जमदग्नि के पैदा
हुआ परशुराम। दूसरी तरफ सत्यवती की माता को
पैदा हुआ विश्वामित्र।
क्षत्रियों
से दुश्मनी :- कृतविर्य का पुत्र अर्जुन ( पांडु पुत्र नहीं ) से अग्नि देव ने भिक्षा
मांगी जिसका मतलब होता है पेड़ पोधे और जानवर इत्यादि को जला कर ख़तम करना और इसी से
अग्निदेव का पेट भरता है।अर्जुन ने इजाजत दी और अग्निदेव ने आपव मुनि के आश्रम को भी जला दिया, जिससे क्रुद्ध
हो कर मुनि ने श्राप दिया कि तेरे हाथ परशुराम
काट देगा ( अर्जुन के 1000 हाथ थे )। इसके बाद कहानी यू बनी की अर्जुन के बेटों ने
जमदग्नि के बछड़े को चुरा लिया। जमदग्नि ने अर्जुन से भयानक युद्ध किया जबकि अर्जुन
को कुछ पता भी नहीं था। परशुराम ने अर्जुन की भुजाओं को काट कर अपने बछड़े को लेे गया।
अर्जुन के बेटों ने बदले में जमदग्नि के आश्रम
पर हमला करके जमदग्नि की हत्या कर दी। जबकि परशुराम घर पर नहीं था। परशुराम ने तब पृथ्वी
से क्षत्रिय शून्य करने कि प्रतिज्ञा की और अर्जुन के पुत्र, पोत्रों को मार दिया।
हजारों क्षत्रियों को मार कर धरती पर खून का कीचड़ कर दिया। फिर जंगल में चले गए। कई
हजार सालों बाद फिर विश्वामित्र के पौत्र परावसु
ने आक्षेप किया की क्षत्रिय ख़तम होने की बात झूठी है और परशुराम झूठी डींग हांकता
है। परशुराम को क्रोध हुआ ( कई हजारों सालों बाद ) और उसने फिर क्षत्रियों को मार डाला।
उसके बाद क्षत्रिय स्त्रियों से जो भी बालक पैदा होते परशुराम मार देता था। पहली बार क्षत्रियों को मारा, दूसरी बार कई हजारों
सालों बाद मारा। तीसरी बार गर्भ में रह गए बालकों को जन्म के बाद मारा। फिर चोथी बार
से 21 बार के लिए क्षत्रिय कहा से आए ?
फिर परशुराम
ने पृथ्वी को ब्राह्मण कश्यप के अधीन कर दिया। क्षत्रिय राजा ना होने से अनाचार फैल
गया। पता है कोनसा अनाचार :- शूद्र ब्राह्मणों की स्त्रियों से अनाचार करते थे।
इस अनाचार
से पृथ्वी रसातल में चली गई लेकिन कश्यप ने अपनी जांघों के सहारे से पृथ्वी को ऊपर
उठाया। पृथ्वी ने कश्यप को प्रसन्न करके वरदान मांगा कि मुझ धरती को शासन चलाने के लिए क्षत्रिय चाहिए जो मेने छुपा
रखे हैं। तब कश्यप ने क्षत्रियों को अलग अलग राज्यों का राजा नियुक्त किया।
मतलब यह कि धरती क्षत्रिय शून्य नहीं हुई।
उपरोक्त
कहानी महाभारत के शांति पर्व में 49 वे अध्याय में है और महाभारत छापने वाला है गीता
प्रेस गोरखपुर। इस महाभारत में यह कहानी श्री कृष्ण जी युधिष्ठर को सुना रहें है।
इस कहानी
को सुन कर धर्मराज युधिष्ठर जी कहते है, " यह मनुष्य लोक धन्य है, इस भूतल के
लोक बड़े भाग्यवान हैं जहा परशुराम ने इतना धर्मसंगत कार्य किया। "
जबकि मुझे
तो इस कहानी से घिन आ रही है।
महाभारत
के ही आश्वमेधिक पर्व 29 वे पर्व में फिर कहानी को दोहराया गया है। लेकिन
इस कहानी में अर्जुन के पुत्रों द्वारा बछड़े चुराने की कोई बात नहीं है। 1000 भुजाओं
वाला अर्जुन युद्ध के मुकाबले के लिए किसी आदमी को ढूंढता रहता था तब समुन्द्र ने उसको जमदग्नि के बेटे परशुराम के बारे
में बताया तो अर्जुन ने जा कर जान बूझ कर उल्टे
काम करने लगा तब परशुराम ने अर्जुन की भुजाओं को काट दिया। तब भयानक युद्ध छिड़ गया।
परशुराम ने अर्जुन की सेना को मार दिया। कुछ सैनिक पहाड़ों में छिप गए और वह शूद्र
कार्य करके शूद्र बन गए। इस कहानी में जमदग्नि की हत्या की कोई बात नहीं है। लेकिन
अध्याय के आखिर में पिता के वध से क्रोधित परशुराम बताया गया है।
क्षत्रिय
वीरों के मारे जाने से ब्राह्मणों ने नियोग द्वारा क्षत्रिय स्त्रियों से बच्चे पैदा
किया जिनको फिर बड़े होने पर परशुराम ने फरसे से काट डाला। इस तरह 21 बार हुआ।
क्यों,
आपको घिन आती है या नहीं। मुझे तो घिन आ रही है।
ब्रह्मवैवर्त
पुराण में भी परशुराम की कहानी है, लेकिन इस कहानी में परशुराम अपने पिता के वध तक
कहानी में कहीं नहीं है। वध इसलिए क्योंकि कृतविर्य पुत्र अर्जुन परशुराम के पिता जमदग्नि
से उसकी कामधेनु गाय मांगता है तब जमदग्नि कहता है कि हम ब्राह्मण सिर्फ लेते ही है।
देते नहीं। इसलिए युद्ध होता है और जमदग्नि की मृत्यु होती है। अब आप याद करिए कि ऋचिक
द्वारा तैयार किए गए चरु से ही जमदग्नि का जन्म हुआ था और दूसरा चरु जो ऋचिक ने अपनी
सास के लिए तैयार किया था उससे विश्वामित्र का जन्म हुआ था।बाल्मीकि रामायण के बाल
काण्ड में 54 वे सर्ग में राजा विश्वामित्र का युद्ध वसिष्ठ से कामधेनु गाय
के लिए हुआ दिखाया गया है। दोनों कहानियों में गायों ने अपने शरीर से सेना की रचना
की और विरोधियों को परास्त किया।
परशुराम
की माता रेणुका, परशुराम के सामने ही, परशुराम के द्वारा अग्नि देने से ही, पहले से हुई तैयारी से जमदग्नि के साथ सती हो जाती
है।
तब परशुराम
ने धरती को 21 बार क्षत्रिय विहीन करने की
शपथ ली। ( क्या परशुराम को पहले से पता था कि 2 या 3 बार से क्षत्रिय समाप्त नहीं होंगे
)
अपनी प्रतिज्ञा
की पूरी करने के लिए परशुराम ब्रह्मा के पास गया, ब्रह्मा ने शिव के पास भेजा ।
परशुराम
की प्रतिज्ञा को सुन कर पार्वती और भद्रकाली क्रुद्ध हो गई और परशुराम की भर्त्सना
की।
ब्रह्मवैवर्त
पुराण में लिखा है कि परशुराम ने क्षत्रियों के गर्भ में स्थित तथा माता की गोद में
खेलने वाले शिशुओं का, नौजवानों का तथा वृद्धों का सहार कर दिया।
बाल्मीकि
रामायण में भी राम द्वारा शिव धनुष तोड़ने पर क्रुद्ध परशुराम के आने का जिक्र है बालकाण्ड
के 75 वे सर्ग में। वह राम को बताता है कि पिता के वध का बदला लेने के लिए, बार बार
उत्पन्न हुए क्षत्रियों का 21 बार वध किया। लेकिन क्या दशरथ और राम क्षत्रिय नहीं थे
क्या जिनसे परशुराम बात कर रहा था ? क्षत्रिय विहीन कैसे हुआ ?
ब्रह्मवैवर्त
पुराण में परशुराम की अपनी प्रतिज्ञा पूरे करने के लिए सहायता के लिए श्री कृष्ण का जिक्र है। श्री कृष्ण पैदा हुए द्वापर
युग के अंत काल में जबकि राम पैदा हुए त्रेता युग में। श्रीकृष्ण की सहायता से द्वापर
युग में अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने की बात राम
को त्रेता युग में बता रहे है परशुराम जी। इसका मतलब सतयुग, त्रेता युग, द्वापर युग
इत्यादि मनघड़ंत हैं। महाभारत युद्ध में को 167 करोड़ सैनिक और राजा मारे गए थे क्या
वह क्षत्रिय नहीं थे ?
संबंधित
पन्ने नीचे पोस्ट कर दिए गए है। हमारे सनातन धर्म वालों ने इन महान ग्रंथों की रचना
की थी। पढ़ने वालों को मेरा धन्यवाद करना चाहिए जो इन महान ग्रंथो से अवगत करवा रहा
है।

0 Comments
Please do not enter any spam Link in the comment box